June 18, 2024

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अपने दुश्मनों को प्यार कीजिये

मत्ती 5:44 – किन्तु मैं कहता हूँ कि अपने शत्रुओं से भी प्यार करो। जो तुम्हें यातनाएँ देते हैं, उनके लिये भी प्रार्थना करो। पवित्र बाइबल हमें लड़ना नहीं सिखाती है और ना ही यह हमें युद्ध करने को कहती है। परमेश्वर का सुसमाचार हमें प्रेम, धैर्य और सहिष्णुता के बारे में सिखाता है। बाइबल ना… Continue reading अपने दुश्मनों को प्यार कीजिये

क्यों लोग इन्कार करते हैं कि परमेश्‍वर का अस्तित्व है, यदि वे उसे तर्क के द्वारा जान सकते हैं?

मानवीय मन के लिए अदृश्य परमेश्‍वर को जानना एक बहुत बड़ी चुनौती है। बहुत से लोग इसी कारण डरे हुए हैं। एक और कारण कि क्यों बहुत से लोग परमेश्‍वर को जानना ही नहीं चाहते हैं, वह यह है कि ऐसा करने से उन्हें अपना जीवन परिवर्तित करना होगा। यदि कोई ऐसा है जो यह… Continue reading क्यों लोग इन्कार करते हैं कि परमेश्‍वर का अस्तित्व है, यदि वे उसे तर्क के द्वारा जान सकते हैं?

क्या हम परमेश्‍वर के अस्तित्व को अपने तर्क से जान सकते हैं?

हाँ, मानवीय तर्क परमेश्‍वर को निश्चित रूप से जान सकता है।    संसार का उद्गम और गंतव्य इसके स्वयं के भीतर से नहीं हो सकता है। प्रत्येक वस्तु जिसका अस्तित्व है, उसके बारे में, उसके दिखाई देने से कहीं अधिक, और भी बहुत कुछ होता है। इस संसार की व्यवस्था, सुन्दरता और विकास स्वयं से… Continue reading क्या हम परमेश्‍वर के अस्तित्व को अपने तर्क से जान सकते हैं?

हम परमेश्‍वर की खोज क्यों करते हैं?

परमेश्‍वर ने हमारे हृदय में उसकी खोज करने और उसे पा लेने की तड़प को डाल दिया है। सन्त अगस्तीन ने कहा है, “तूने हमें अपने लिए रचा है, और जब तक हमारे हृदय तुझे पा नहीं लेते तब तक बैचेन रहेंगे।” हम इस तड़प को “धर्म” के नाम से पुकारते हैं।     मनुष्य के लिए… Continue reading हम परमेश्‍वर की खोज क्यों करते हैं?

क्यों परमेश्‍वर ने हमारी सृष्टि की?

परमेश्‍वर ने हमें अपने स्वतंत्र और निस्वार्थ प्रेम में हो कर रचा है।   जब एक व्यक्ति प्रेम करता है, तो उसका हृदय बहता फ़व्वारा बन जाता है। वह अपने आनन्द को दूसरों के साथ साझा करना चाहता है। वह इसे अपने सृष्टिकर्ता से प्राप्त करता है। यद्यपि परमेश्‍वर एक रहस्य है, परन्तु फिर भी… Continue reading क्यों परमेश्‍वर ने हमारी सृष्टि की?

किस उद्देश्य के लिए हम इस पृथ्वी पर हैं?

हम इस पृथ्वी पर इस लिए हैं ताकि हम परमेश्‍वर को जानें, उससे प्रेम करें, उसकी इच्छा के अनुसार भला जीवन जियें, और फिर किसी दिन स्वर्ग चले जाएँ। मनुष्य होने का अर्थ परमेश्‍वर की ओर से आना और परमेश्‍वर की ओर ही चले जाना है। हमारा उद्गम हमारे माता-पिता की अपेक्षा कहीं दूर हमारे… Continue reading किस उद्देश्य के लिए हम इस पृथ्वी पर हैं?