May 20, 2024

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असीसी के सन्त फ़्रांसिस की प्रार्थना

हे प्रभु,

मुझे अपनी शांति का एक साधन बना ले;

जहाँ घृणा हो, वहाँ प्रेम;

जहाँ चोट हो, वहाँ क्षमा;

जहाँ संदेह हो, वहाँ विश्वास;

जहाँ निराशा हो, वहाँ आशा;

जहाँ अंधकार हो, वहाँ प्रकाश

और जहाँ विषाद हो, वहाँ आनन्द तथा दिलासा लाऊँ।

हे दिव्य गुरू,

मुझे यह वर दे कि मैं सान्त्वना खोजने के बजाय सान्त्वना देता रहूँ;

समझा जाने के बजाय समझने की कोशिश करूँ

और प्रेम की आशा करने के बजाय प्रेम करता रहूँ।

मुझे यह एहसास करा दे कि त्याग करने से ही प्राप्ति होती है;

क्षमा करने से ही क्षमा मिलती है

और प्राण त्यागने से ही अनन्त जीवन मिलता है। आमेन।

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