July 25, 2024

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फ़ादर होसे मरिया रुबियो – वह आश्चर्यकर्म जिन्होंने उन्हें सन्त बनाया

फ़ादर होसे मरिया रुबियो की मृत्यु 2 मई 1929 में कुर्सी पर बैठे हुए आकाश की ओर देखते हुए हुई। ऐसा कहा जाता है कि पूरे मैड्रिड शहर के लोग यह दोहराते रहे कि, “एक सन्त की मृत्यु हो गयी है!” इसका अर्थ है कि जिस तरह से उन्होंने निर्धन लोगों की सहायता की, जैसा साधारण जीवन उन्होंने यापन किया, और जिस जुनून के साथ उन्होंने सब को परमेश्‍वर के वचन की शिक्षा दी उसके लिए उनके जीवनकाल में ही लोगों ने उन्हें एक सन्त मान लिया था।

परन्तु आज हम आप को बताएँगे उन तीन सबसे सामर्थी चंगाइयों के बारे में जिन्हें फ़ादर होसे मरिया रुबियो के नाम के द्वारा हुए आश्चर्यकर्म के रूप में अधिकारिक मान्यता प्राप्त है। जो उनके जन्म स्थान, डालियास में, उनके पसन्दीदा शहर मैड्रिड में, और अरांहुऐज़ में, जहाँ उनकी मृत्यु हुई, में कालक्रम अनुसार घटित हुए।

  • जुलाई 1994 में डॉ. अल्बेर्तो बेरदेहो ने मारिया दोलोरेस तेर्रेस को एक कैंसर युक्त प्राणघातक रसौली का होना बताया और उन्हें चिकित्सालय में चिकित्सा करवाने के लिए भर्ती होने के लिए कहा। उनकी मानवतरित बहन ने फ़ादर होसे मरिया रुबियो के बारे में सोचा और नोविना अर्थात् नवाह वाली प्रार्थनाएँ कीं। अविश्‍वसनीय रूप से, अन्त में, जब उन्हें चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, तब वहाँ पर रसौली का कोई निशान नहीं पाया गया न ही इसके अस्तित्व में होने का कोई प्रमाण मिला। इस आश्चर्यकर्म के कारण, फ़ादर होसे मरिया रुबियो की “पवित्रता और आश्चर्यकर्म की प्रतिष्ठा” की प्रक्रिया को 30 अप्रैल, 1945 में आरम्भ किया गया।
  • ढाई वर्ष की उम्र में, मारिया विक्टोरिया यक्ष्मा नामक दिमाग़ी बुखार से पीड़ित थी जो उसे निश्चित ही मृत्यु की ओर ले जाता। उनकी माँ ने सोचा कि परमेश्‍वर के लिए कुछ भी असम्भव नहीं है, और उन्होंने किसी से कहा कि वह उनके लिए फ़ादर होसे मरिया रुबियो के स्मृतिचिन्ह का प्रबन्ध कर दें। कुछ समय के पश्चात्, इस लड़की ने बिना किसी प्राकृतिक विवरण के बीमारी के ऊपर विजय को प्राप्त किया और इस घटना ने 6 अक्तूबर 1985 को फ़ादर होसे मरिया रुबियो के लिए धन्य ठहराए जाने के मार्ग को प्रशस्त किया।
  • यह बिना किसी चिकित्सा विवरण के कैंसर युक्त फेफड़े की रसौली की विस्तारवर्धक उन्नत अवस्था का पूर्ण रूप से चंगा होना था। फ़ादर सैंटियागो गार्सिया लोमास, प्रोफ़ेसेस हाऊस के सुपीरियर, जहाँ होसे लुइस गोमेज़ मुन्तान रहा करते थे, ने फ़ादर होसे मरिया रुबियो की मध्यस्थता के द्वारा चंगाई पाने के लिए विनती की जिनमें उनके प्रति बहुत अधिक भक्ति थी। और रसौली ख़त्म हो गयी। इस आश्चर्यकर्म को फ़ादर होसे मरिया रुबियो के सन्त बनाए जाने के लिए प्रस्तुत किया गया था।

क्योंकि फ़ादर होसे मरिया रुबियो के सन्त बनाए जाने के लिए 33 गवाहों ने गवाही दी थी और 3 पहले हुए आश्चर्यजनक चंगाई के कार्यों को ध्यान में रखा गया था इसलिए 4 मई 2003 में, फ़ादर होसे मरिया रुबियो को पोप जॉन पाल द्वितीय के द्वारा सन्त घोषित किया गया।

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